Saturday, January 13, 2018

Umar Umar

Aurangabad sadar hospital aurangabad | औरंगाबाद सदर अस्पताल औरंगाबाद बिहार।

औरंगाबाद सदर अस्पताल
औरंगाबाद सदर अस्पताल
ये फोटो औरंगाबाद सदर अस्पताल (सरकारी अस्पताल) का  है जो सरकार द्वारा संचालित किया जाता है। इसमें मरीज मुप्त में इलाज करवाते है। आप इसे दूर से ही पहचान सकते है क्योंकि भाई जो सरकारी अस्पताल है यहाँ आपको बड़ी बिल्डिंग तो दिख जाएगी हर एक डिपार्टमेंट के लिए एक अलग से रूम दिखेगा। साथ ही आधुनिक इलाज के लिए जो भी उपकरण जरूरत पड़ती है वो सभी अवेलेबल है पर किया जो इलाज आपको प्राइवेट अस्पताल में इलाज मिलती वो किया यहां मिलती है? यहाँ की हालत इतनी खराब है उसका बयान नही किया जा सकता है। आपको तो कहने को तो फ्री में इलाज तो हो जाती है पर दवा किया आपको उसी अस्पताल में मिलती है? भाई सभी जगह भ्रस्टाचार है यहां तक कि अस्पताल में भी जहा किसी की जिंदगी बचाई जाती है।।
सदर अस्पताल का हाल बेहाल है। यहां अस्पताल की व्यवस्था सुधरने के बजाय बिगड़ता जा रहा है। अस्पताल में मरीज प्रतिदिन हंगामा करते हैं। यूं कह लीजिए अस्पताल को आक्सीजन की जरूरत है। अस्पताल को आइएसओ का दर्जा मिला है परंतु यहां सुविधा के नाम कुछ भी उपलब्ध नहीं है। एक्सरे एवं अल्ट्रासाउंड सुविधा महीनों से बंद बड़ा रहता है। मरीज इलाज के लिए अस्पताल में तड़पते रहते हैं परंतु उनका हाल जानने भी कोई कर्मी नहीं पहुंचता है। परिसर में मरीज भटकते रहते हैं। स्थिति यह है कि अस्पताल से आमजन का विश्वास उठ जाता है। सरकार तो बहुत ही पैसे खर्च करती है पर अधिकारी उसे उपर ही गडक जाते है।
32 की जगह छह चिकित्सक : सदर अस्पताल में 32 चिकित्सकों के स्वीकृत पद हैं। चिकित्सकों का अधिकांश पद खाली पड़ा है। चिकित्सकों के न रहने के कारण अस्पताल की व्यवस्था बदतर हो जाती है। यहां कई विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद खाली पड़ा है। अस्पताल में शिशु, सर्जन, मुरक्षक, चर्म रोग, कान, नाक, गला रोग के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है।

112 में मात्र 60 दवा उपलब्ध : सदर अस्पताल में दवा का अभाव हमेशा रहता ही है। दवा पर यहां एक वर्ष में 26 करोड़ रुपये खर्च होता है। अस्पताल में हमेशा दवा का अभाव रहता है। मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। नियमानुसार आउटडोर में 33 दवा होनी चाहिए परंतु यहां मात्र 16 दवा उपलब्ध है। इंडोर में 112 की जगह मात्र 60 दवा उपलब्ध है। दवा नहीं रहने के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दवा के लिए अस्पताल में मरीज तड़पते रहते हैं।


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