Wednesday, December 6, 2017

Aurangabadian

deokund shiv temple most tourist attractive place of aurangabad bihar

Deokund aurangabad
Deokund aurangabad

Deokund aurangabad
Deokund Haspura Road 
देवकुंड औरंगाबाद। deokund Aurangabad, महर्षि च्यवन की तपोभूमि देवकुंड में कुण्ड की अग्नि पांच सौ वषरे से अधिक समय से प्रज्ज्वलित है। अरवल और औरंगाबाद की सीमा पर स्थित देवकुंड वह धरती है जहां भगवान श्री राम गया में अपने पितरों को पिण्डदान करने से पूर्व ही भगवान शिव की स्थापना कर पूजा अर्चना की थी। बाद में महर्षि च्यवन ने उसी स्थल को अपनी तपोभूमि बनाया और वषरे तपस्या की। पांच सौ वषरे पूर्व बाबा बालपुरी ने च्यवन ऋषि के उसी आश्रम में साधना की और हवन करने के बाद जिन्दा समाधी ले ली। तब से उस कुण्ड की अग्नि आज तक प्रज्ज्वलित है। ऐसा भी नहीं कि उस कुण्ड में प्रतिदिन हवन होता है।ड्ढr ड्ढr इक्के-दुक्के आने-जाने वाले लोग ही उस कुण्ड में धूप डालते हैं या फिर किसी विशेष अवसर पर वहां हवन आयोजित होता है किन्तु कुण्ड की अग्नि पांच सौ वषरे से कभी नहीं बुझी। ऊपर से देखने पर कुण्ड राख का ढेर लगता हैं किन्तु राख में थोड़ा सा भी हाथ डालने पर उसके नीचे अग्नि का एहसास होता है। कुण्ड में धूप डाल कर पास रखे छड़ से जैसे ही राख को उड़ेला जाता है उसकी अग्नि धूप को पकड़ लेती है और कुण्ड से धूंआ निकलना शुरू हो जाता है। कुण्ड के बगल में ही महर्षि च्यवन की प्रतिमा स्थापित है और बगल में बाबा बालदेव का वह आसन रखा है जिस पर बैठकर उन्होंने साधना की थी। कुण्ड के सामने बाबा बालपुरी की समधी स्थल पर छोटे-छोटे दस शिवलिंग स्थापित हैं। बाबा दुधेश्वरनाथ के नाम से प्रसि भगवान शिव का मंदिर कुण्ड से कुछ दूरी पर सहस्त्रधारी (तालाब) के किनारे हैं जहां पहले भगवान श्री राम और बाद में च्यवन ऋषि ने पूजा अर्चना की थी। मंदिर के पुजारी अखिलेश्वरानंद पुरी एवं देवकुण्ड स्थित रामध्यान दास महाविद्यालय के प्राचार्य योगेन्द्र उपाध्याय बताते हैं कि महर्षि चवन जब यहां तपस्या में लीन थे तो उस समय वहां के राजा शरमाती और उनकी पुत्री सुकन्या जंगल में भ्रमण के लिए आए थे। सुकन्या एक टीले के बीच चमकती रोशनी देखकर उसमें कुश डाल दी।ड्ढr ड्ढr दरअसल वह तपस्या में लीन महर्षि च्यवन थे जिनकी आंखे सुकन्या के कुश डाले जाने के कारण फूट गई। महर्षि के श्राप से बचने के लिए राजा ने सुकन्या से महर्षि चवन की शादी कर दी। वृ महर्षि च्यवन से नवयौवन सुकन्या की विवाह के बाद अश्विनी कुमारों ने यज्ञ कर महर्षि च्यवन को उसी सहस्त्रधारा में स्नान कराया और विशेष रसायन तथा सोमरस का पान कराया जिसके बाद महर्षि च्यवन को यौवन प्राप्त हुआ वही रसायन बाद में च्यवनप्राश के नाम से प्रसि हुआ। आज भी सावन के महीने में लोग दूर -दूर से भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं और हवन कुण्ड में धूप अर्पित करते हैं। सहस्त्रधारा में बड़े पैमाने पर छठ पर्व आयोजित किया जाता है।

अगर आप चाहते है की ऐसे ही बेहतरीन आर्टिकल पढना तो आप अपना ईमेल आई डी यहाँ डाले और सीधे पाए लेख अपने ईमेल पे :
आपको इस आर्टिकल को पढने के लिए और इस पेज पे विजिट के लिए धन्यवाद | आपको ये आर्टिकल कैसा लगा हमें जरुर बताये निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में. आप अपना बहुमूल्य विचार निचे व्यक्त करें.

10 comments

Write comments
Anonymous
AUTHOR
December 6, 2017 at 10:05 PM delete

बहुत अच्छी जानकारी मुहैया कराया।।।

Reply
avatar
Aurangabadian
AUTHOR
December 6, 2017 at 10:07 PM delete

धन्यवाद भाई की जानकारी आपको रोचक लगी।।

Reply
avatar
Suhail Shah
AUTHOR
December 7, 2017 at 10:54 PM delete

भाई देवकुंड तो बहुत खूसूरत जगह है।।।

Reply
avatar
Unknown
AUTHOR
July 28, 2018 at 7:59 PM delete

Thanku more information abaot Deokund

Reply
avatar
Iqbal ansari
AUTHOR
August 3, 2018 at 3:10 PM delete

Sath me deokund me padhne ka institute bhi jayada hai.

Reply
avatar
Umar
AUTHOR
August 16, 2018 at 4:15 PM delete

भाई बहुत बढ़िया जानकारी।

Reply
avatar
Aurangabadian
AUTHOR
August 18, 2018 at 12:30 PM delete

Deokund aurangabaf is very beautiful city and town. ये बात बिल्कुल सही अगर आपको ये आर्टिकल अच्छा लगा तो उसके लिए धन्यवाद।

Reply
avatar
Aurangabadian
AUTHOR
August 18, 2018 at 12:32 PM delete

जानकारी अच्छी लगी उसके लिए धन्यवाद। इसे दोस्तो के साथ जरूर शेयर करें।

Reply
avatar
Aurangabadian
AUTHOR
August 18, 2018 at 12:35 PM delete

जी बिलकुल इक़बाल भाई Deokund विद्यार्थियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण जगह है यहाँ सभी चीजों के लिए और हर वर्ग के कई कोचिंग क्लासेज भी चलाया जाता है।

Reply
avatar
Aurangabadian
AUTHOR
August 18, 2018 at 12:37 PM delete

धन्यवाद जानकारी आपको अच्छी लगी।

Reply
avatar