Friday, August 24, 2018

Aurangabadian

Historical city Daudnagar ऐतिहासिक शहर दाउदनगर

Daudnagar
Daudnagar
दाउदनगर Daudnagar is major city and Block in Aurangabad district.
दोस्तो किया आपने कभी औरंगाबाद जिला के  दाउदनगर शहर में  कभी गए है? सम्भवतः जरूर गए होंगे कियूंके दाउदनगर न केवल शहर है बल्कि औरंगाबाद जिले की शान है ये औरंगाबाद जिले के दूसरा सबडिवीजन भी है।

इतना ही नही बताना चाहूंगा कि औरंगाबाद जिले के दाउदनगर ही एक ऐसा शहर है जो कभी भी भविष्य में एक अलग जिला भी बन सकता है। इस बारे बताना चाहूंगा के दाउदनगर से काफी पिछड़े होने के बावजूद अरवल जिला बना मगर दाउदनगर जिला नही बना इसके पीछे जो भी कारण वो जरूर पढ़ें । )  आधुनिक शहर  में जो सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए वो सभी सुविधाएं यहाँ उपलब्ध है।

इसके अलावा किया आपको मालूम है  दाउदनगर औरंगाबाद जिले के उन शहरों में से एक जो एक ऐतिहासिक शहर है ये शहर अपने आप मे इतिहास समाये बैठा है। यहाँ आपको जगह जगह आपको 200 साल पहले की कई सुबूत भी मिल जाएंगे।

आइए ऐसे ऐतिहासिक और प्राचीन शहर के बारे में जानते है। दरअसल ये शहर भारत की मशहूर और बड़ी सोन नदी के किनारे बसा हुआ एक प्यारा सा शहर जो कि ऐतिहासिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा कलात्मक सोंच को आपस में जोड़ता है।

दाउदनगर का इतिहास history of Daudnagar

जब भी दाउदनगर का इतिहास के बारे में बात होगी तो इस शहर के संस्थापक दाऊद खान का लोग कैसे भूल सकते है उनका नाम अवश्य लिया जाएगा। दाऊद खान के किले के बारे में ज्यादा पढ़ने के पहले से एक लेख है । आप यहाँ पढ़े दाउदनगर किला।
दाउदनगर में स्थित उनका का किला आज भी 17वीं शताब्दी की याद ताजा कराता है जो कि आज कल इस किला की स्थिति सही रख रखाव के अभाव में दयनीय स्थिति में है।

याद रहे पलामू युद्ध में विजयी रहे दाऊद खान तत्तकालीन बादशाह औरंगजेब के करीबी माने जाते थे। काफी लोगों का मानना है कि पलामू फतह के बाद वापस जा रहे दाऊद खान ने मोजुदा दाउदनगर के क्षेत्र में आराम करने के लिए कैंप डाला। उन्हें यह क्षेत्र काफी हद तक  पसंद आया लिहाजा यही एक कारण था जो उन्होंने दाउदनगर की स्थापना की।

किले के निर्माण वक़्त सुरक्षा के नज़रिए से शहर में चार फाटक स्थापित किये गए थे जिसमें से आज भी एक फाटक पुरानी शहर और नई शहर के बीच में मौजूद है। किला के चारों तरफ सुरक्षा दीवार बानी हुई है तथा किले में प्रवेश करने के लिए दो मुख्य द्वार उपस्थित हैं। सैनिकों की तैनाती के लिए दीवारों के चारों कोनों पर जगह बानी हुई है। किया आपको मालूम है कि किले के अंदरूनी क्षेत्र में खुफिया सुरंग भी देखने को मिलती है। यह सुरंग कहाँ जाकर मिलती है इसकी प्रयाप्त जानकारी किसी के पास उपलब्ध नहीं है।

दाउदनगर के शासक दाऊद खान के द्वारा बड़े से सराय खाने का भी निर्माण कराया गया था। शहर में अभी भी एक सड़क सराय रोड के नाम से जानी जाती हैं जहाँ पे नवाब अहमद खान (दाऊद खान के पोते) के समय में बनवाई गई मस्जिद अभी भी मौजूद है। दाऊद खान से जुडी हुई दाउदनगर वासियों के लिए दो ऐतिहासिक धर्मस्थल भी मोजुद हैं। नवाब साहब का मज़ार और घोड़े शाह का मज़ार जहाँ पे रज़ब के महीने की 10 तारीख को उर्स मनाया जाता है जिसमें हर धर्म के लोग शामिल होते हैं।

 यहाँ के लोगों के लिए एकता और गंगा-जमुनी तहज़ीब का मिशाल कायम करता है।
बताना चाहूंगा कि दाऊद खान एक धार्मिक निरपेक्ष शासक थे उनके शासन में हर तरह के धर्म के लोग रहते थे
दाऊद खान के समय उनके सैनिकों में जाट जाती के लोगों की प्रधनता हुआ करती थी जिसके स्मरण में दाऊद खान ने एक इलाके को जाट लोगों को समर्पित किया जो बाद में जाट टोला के नाम से मशहूर हुआ। लेकिन दुःख की बात यह है कि मोजुदा समय में जाट जाती के लोग दाउदनगर से प्रायः लुप्त हो गए हैं।

दाउदनगर शहर औरंगाबाद जिला के अंतर्गत आने वाला दूसरा अनुमंडलीय क्षेत्र है। किया आपको मालूम है  यहाँ की नगरपालिका सन् 1885 से मोजुद है जो वर्तमान में दाउदनगर नगर पंचायत के रूप से उपस्थित है।

दाउदनगर की जनसंख्या की बात करे तो 2011 जनगणना के अनुसार यहाँ की आबादी 52,364 थी। यहाँ के लोग मूल रूप से हिंदी, इंग्लिश, उर्दू तथा मगही भाषा का प्रयोग अपने जीवन यापन में  करते हैं। अंछा ग्राम को दाउदनगर का संथाल परगना माना जाता है। दाउदनगर के लोग अपनी जिंदगी यापन को निर्वाह करने के कृषि तथा खुचरा ही इनका आय का मुख्य स्रोत है।

दाउदनगर की भूगौलिक स्थिति।Geographical of Daudnagar.

अभी दाउदनगर में काफी उची लागत से सोन नदी पे ब्रिज का निर्माण कार्य जारी है
 बात करे दाउदनगर की भूगोलिक स्थिति की तो           बिल्कुल जो पूरे बिहार की लगभग वही है।
यहाँ की जलवायु उष्णाद्र है। यहाँ चार महीने ठंड पड़ती है जो लगभग नवम्बर महीने से शुरू होकर फरवरी महीने तक जारी रहती है यहाँ दिसम्बर तथा जनवरी के महीने में काफ़ी ठण्ड पड़ती है और न्यूनतम तापमान 5C तक चला जाता है। जब कि मई के महीने में तापमान बढ़ कर 48०C तक हो जाता है।

यहाँ कृषि ही जीवन का मुख्य स्रोत है और कृषि के लिए वर्षा का जल वयापक रुप से यूज होता है। यहां की बारिश मॉनसूनी है जो लगभग चार महीने तक होती है यहाँ पर औसतन वार्षिक वर्षा 128cm होती है।

यहाँ पे साफ और पेय योग्य पेयजल आसानी से उपलब्ध है। बहुत ही कम खर्चे में घर घर पेयजल आसानी से उपलब्ध है। यहाँ का पेयजल काफी स्वास्थवर्धक माना जाता है।

 दाउदनगर तथा आसपास के इलाके में दो प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। सोन नदी के दियारे क्षेत्र में बलुआही तथा अन्य क्षेत्र में जलोढ़ मिटटी उपलब्ध है।

दाउदनगर के पश्चिम में सोन नदी तथा पूर्व की दिशा में सोन नहर है जो कि रोहतास जिला से निकल कर पटना जीला तक बहती है।


दाउदनगर चौहद्दी की बात करें तो

उत्तर में अगनूर, कलेर
दक्षिण में अरंडा, ओबरा
पूर्व में हंसपुरा, पचरुखिया, गोह
पश्चिम से सोन नदी, नासरीगंज पड़ता है।

यहाँ की बनस्पति उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वन है। यहाँ बृक्षों में आम, महुआ, बरगद, पीपल, नीम आदि की प्रधानता है।
यहाँ पे मुख्य रूप से रबी, खरीफ तथा गर्मा किस्म की फसलें होती है। मुख्यतः धान तथा गेहूं की फसल की खेती होती है। विशेष कर कद्दू (लौकी) तथा परवल की पैदावार अच्छी होती है जिसे कई राज्यों में भेजा जाता है।

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