Sunday, September 16, 2018

Aurangabadian

Top tourist places in Aurangabad bihar औरंगाबाद जिले में मुख्य रूप से पर्यटन क्षेत्र

Ramesh chowk aurangabad
Ramesh chowk aurangabad

औरंगाबाद जिला बिहार के 38 जिलों में से एक है। इसका इतिहास भी काफी पुरानी है और इस वजह से पुरानी इतिहास के लिए जाना जाता है। इसी पुरानी  इतिहास के वजह से इसे बिहार का चितोरगढ़ कहा जाता है। यहां आप अधिक औरंगाबाद जिले का इतिहास पढ़ सकते हैं।  औरंगाबाद जिला फसलों और पतझड़ वनों से  काफी हरि भारी होने के अलावा पक्षियों के चहचहाना लोगो को काफी लुभाता है। इस प्रकृतिक पहचान और आकर्षण के अलावा इस जिला में अनेकों ऐसे ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक स्थान है जो काफी दूर दूर के लोगो को अपनी तरफ खिंचता है। लोग सलों साल यहां घूमने को आते रहते है। आमतौर पे यहाँ घूमने का मौसम साल में 12 महीने माकूल नही है पर जो सबसे ज्यादा अनुकूल और सहज मौसम अक्टूबर से लेकर मार्च तक होता है। तो इसी चर्चा में आपको बताने जा रहा हूं औरंगाबाद जिले में प्रमुख घूमने के स्थान के बारे में।





देव सूर्य मंदिर Deo Surya Mandir


 औरंगाबाद जिले में धार्मिक लिहाज से देखा जाए तो पहले स्थान पे देव सूर्य मंदिर ही है। देव सूर्य मंदिर देश और बिहार का धरोहर और अनूठी विरासत है. हर साल छठ पर्व पर यहाँ लाखो स्राधालू छठ करने झारखण्ड , मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से यहाँ आते है.  कहा जाता है की जो पूजा करते है उनकी मनोकामना जरुर पूरी होती है. और अधिक पढ़े यहाँ से--


अमझर शरीफ दरगाह Daragah Amjhar sharif

ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से मशहूर बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला अंतर्गत हसपुरा प्रखंड का अमझर शरीफ खानकाह सरकारी और प्रशानिक भेदभाव का शिकार है। इस स्थल को अगर विकसित किया जाता तो पर्यटन के क्षेत्र में इस जगह का अलग नाम  होता। और अधिक पढ़े यहाँ से--


देवकुण्ड शिव मंदिर Deokund shiv Mandir


देवकुंड औरंगाबाद। deokund Aurangabad, महर्षि च्यवन की तपोभूमि देवकुंड में कुण्ड की अग्नि पांच सौ वषरे से अधिक समय से प्रज्ज्वलित है। अरवल और औरंगाबाद की सीमा पर स्थित देवकुंड वह धरती है जहां भगवान श्री राम गया में अपने पितरों को पिण्डदान करने से पूर्व ही भगवान शिव की स्थापना कर पूजा अर्चना की थी।  और अधिक पढ़े यहाँ से--




उमगा सूर्य मंदिर Umga Surya Mandir

ये प्राचीन सूर्य मंदिर जो उमगा में है औरंगाबाद  जिला मुख्‍यालय से 27 कि0‍मी0 की दूरी पर अवस्थित है और  ग्रैण्‍ड ट्रंक रोड जिसे अधिकतर लोग( जीटी रोड के नाम से भी जानते है) से 1.5 कि0मी0 दक्षिण की ओर एवं देव सूर्य मंदिर से से 12कि0मी0 की दूरी पर स्थित है जो कि औरंगाबाद जिले और  बिहार राज्य की सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरों में से एक है। और अधिक पढ़े यहाँ से--


 दाऊद खान का किला Daud Khan ka Kila

दाउदनगर में स्थित उनका का किला आज भी 17वीं शताब्दी की याद ताजा कराता है जो कि आज कल इस किला की स्थिति सही रख रखाव के अभाव में दयनीय स्थिति में है।
याद रहे पलामू युद्ध में विजयी रहे दाऊद खान तत्तकालीन बादशाह औरंगजेब के करीबी माने जाते थे। काफी लोगों का मानना है कि पलामू फतह के बाद वापस जा रहे दाऊद खान ने मोजुदा दाउदनगर के क्षेत्र में आराम करने के लिए कैंप डाला। उन्हें यह क्षेत्र काफी हद तक  पसंद आया लिहाजा यही एक कारण था जो उन्होंने दाउदनगर की स्थापना की। और अधिक पढ़े यहाँ से--


देव राज किला dev Raj Kila

बताना चाहूंगा कि ये राजपूत परिवार के सिसोदिया वंस से जुड़ी हुई है. ये वर्णन इतिहास में मिलती है कि देव किला का सबसे अंतिम राजा जगनाथ जी थे . जो काफी लंबे समय तक अपने राज्य में शांति और वह प्रजा लोगो के साथ शांति के साथ राज्य का जिम्मा अपने हाथ मे लेकर शासन किया. उनका कोई भी अपना संतान नही था. उनके देहांत के बाद बारी आई कि अब राज्य का जिम्मा कौन संभाले तो ये जिम्मेदारी उनकी बीवी को लेनी थी. उनकी दो पत्नियां थी जेसमे से राज्य का जिम्मा उनकी छोटी पत्नी ने संभाली। और अधिक पढ़े यहाँ से--

पीरू और सिरिस  Piroo and Siris

पीरू औरंगाबाद जिले के हसपुरा प्रखंड से 6 किलोमीटर दक्षिण में स्थित बड़ा सा एक गांव है। हालांकि ये जगह आधिकारिक तौर पे बहुत समय पहले प्रितिकूट नाम से जाना जाता था। पीरू का भारत का इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है।। आप ने भारत के मशहूर और सुप्रसिद्ध कवि बाणभट्ट का नाम जरूर सुना होगा वो सुप्रसिद्ध महाकवि पीरू के ही निवासी थे। हालाँकि पीरू को जो नाम हासिल होना चाहिए था वो अभी तक हासिल नही हो पाया।

सिरिस Siris सिरीस औरंगाबाद पर्यटन क्षेत्र के नक्शे पर एक और महत्वपूर्ण स्थान है। सिरीस शेरशाह और मुगल साम्राज्य के शासन के दौरान एक परगना हुआ करता था। कई सालों तक यह स्थान 1857 के विद्रोह के कुछ गुमनाम शूरवीरों के खेल का मैदान हुआ करता था।  सिरीस में एक मस्जिद भी है, जो औरंगजेब के शासनकाल में बनवायी गई थी। आज भी जो लोग घूमने को लोग यहाँ आते हैं तो इसमें जरूर जा जाते है।




Forts of Pawai  Mali and Chandangarh

पवई, माली और चंदनगढ़ उन लोगों के लिये आनंदित करने वाले स्थल हैं, जो पुरातत्व में रुचि रखते हैं यहां तक अन्य लोगों को भी इस धरोहर को देख प्रसन्नता होगी। यह जगह उन शासकों के पुराने किलों जैसे पुरातात्विक खजाने से भरी है, जो राजस्थान से पलायन करके यहां आये होंगे।

दोस्तो ऊपर दिए गए औरंगाबाद जिले में टूरिस्ट अट्रैक्शन से संबंधित जगह है जो लिस्ट किया गया है अगर इस लिस्ट में अगर आपको लगता है कि कोई स्थान छूट गया है तो आप हमें जरूर suggest करें कमेंट के रूप में। आपकी राय को जरूर लिस्ट किया जाएगा।

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