Thursday, October 11, 2018

Aurangabadian

आस्था व विश्वास का प्रतीक है औरंगाबाद के उमगा मंदिर Umga temple is the symbol of faith and trust

umga temple Aurangabad
umga temple Aurangabad

उमगा मंदिर औरंगाबाद। umga temple Aurangabad औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र में उमगा पहाड़ पर स्थित मां उमंगेश्वरी का स्थान आस्था व विश्वास का प्रतीक है . पर्यटन के दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण उमगा तीर्थस्थान पूरे क्षेत्र विख्यात है .


मनोरम प्रकृति के बीच हजारों वर्ष पूर्व निर्मित मंदिरों व उनमें स्थापित देवी देवताओं के दर्शन कर श्रद्धालु अपने आप को धन्य मानते हैं . उमगा सूर्य मंदिर में अवस्थित शिलालेख में वर्णित है ' याते तर्क नवाग्र बुद्धिन गुणिते सम्वत् सरे विक्रमे वैशाखे गुरू वासरे शिवशरे पक्षे तृतीय तिथौ रोहिण्यां पुरुषोत्तम भुद्रा सुभद्रा प्रतिष्ठान पथदैक देव विधिनः श्री भैरवेंद्रण इन तथ्यों को अवलोकन करने मात्र से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि विक्रम संवत 1946 वैशाख तृतीया गुरुवार के दिन उमगा राज्यवंश के 13 वें खानदान के राजा भैरवेंद्र ने भगवान जनार्दन बलिराम व सुभद्रा की प्राण प्रतिष्ठा देव विधान से विद्वान पंडितों द्वारा करायी थी


. और शेर को मारा था अइल ने 
उमगा का इतिहास काफी पुराना है . यूं तो जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है कि उमगा उमंगा का ही विकृत रूप है . उमगा राज्य अपने था , समय वांकुड़े राजे रजवाड़े मास में खेलने चरमोत्कर्ष उस वीर सावन आखेट के लिए पूरे भारत वर्ष से इस पर आया करते थे आखेट कौशल का आनंद ऐसा कहीं नहीं मिलता था , तभी तो इसका नाम उमंगा रखा गया था . प्राचीन ग्रंथों व शोधों से जो बातें सामने आयी उसके अनुसार यह क्षेत्र कोल - भीठम आदिवासी राजा दुर्दम का क्षेत्र था . शुरू में अइल व इल नामक दो भाई आखेट खेलने आये थे . आखेट के दौरान अपनी बहादुरी से दोनों भाइयों ने शेर को पटक कर मार दिया था . इससे प्रभावित राजा ने प्रसन्न होकर अपनी एकमात्र पुत्री की शादी अइल से कर दी . साथ ही घर जमाई बना कर रखना कबूल करवा लिया . दूसरे भाई अपने देश चले गये . 

उमगा पहाड़ पर हैं 52 मंदिर

 उमगा पहाड़ पर 52 मंदिरों की श्रृंखला है . उमगा पहाड़ स्थित सूर्य मंदिर मां उमंगेश्वरी मंदिर गौरी शंकर मंदिर का अपना इतिहास है . पहाड़ पर बहुमूल्य मूर्तियों की भरमार है . पहाड़ पर प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है .


कलाकृतियों व ऐतिहासिक धर्मस्थल की भरमार है बिखरी पड़ी मूर्तियों के संग्रह के लिए एक संग्रहालय का होना आवश्यक है . यह पहाड़ी पर्यटन के मानचित्र से दूर है . सदियों से उमगा मंदिर विख्यात रहा है . इसकी पुष्टि 18वीं सदी के ब्रिटिश चित्रकार विनियम डेनियल ने भी उमगा आकार मंदिर की पेंटिंग बनाकर कर दी है . पहाड़ी के नीचे तलहटी में सड़क से लगा हुआ पोखरा भी है . उमंगश्वरी मंदिर में वैष्णव और शाक्त सभी एक ही छत के नीचे हैं . मां के बगल में मार्तड भैरव की मूर्ति है . यह दुर्लभ स्थान है , क्योंकि शाक्त और वैष्णव की पूजा एक साथ होती है . भगवती उमंगेश्वरी के मंदिर में श्रद्धालुगण बली पूजा कर अपनी कामना सिद्ध करते हैं . मां के बगल में मार्तड भैरव है . उनकी पूजा वैष्णव रूप में की जाती है . मनोकामना पूर्ण होने पर मां को भक्तगण ढकना में मिट्टी के बर्तन ) चावल के आटे का भेड़ा का स्वरूप बनाकर भोग लगाते । और मां को प्रसन्न करते हैं .


यह ऐसा दुर्लभ स्थान है कि लाखों टन काचट्टान एक छोटा से बिंदु पर टिका हुआ , जो एक रहस्य है . यहां पर श्रद्धालु विशेष रूप से माघ माह के गुप्त नवरात्र में अपनी मनोकामना लेकर मां के दरबार में आते है और उनकी मनोकामाना पूर्ण भी होती है . 

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