Saturday, October 6, 2018

Aurangabadian

चाल्हो पहाड़ औरंगाबाद का एक दर्शनीय वाटर फॉल chalho mountain Aurangabad

चाल्हो पहाड़ औरंगाबाद chalho mountain
चाल्हो पहाड़ औरंगाबाद chalho mountain
चाल्हो पहाड़ औरंगाबाद बिहार चाल्हो पहाड़ औरंगाबाद chalho mountain aurangabad बिहार के औरंगाबाद जिले में कई ऐसे वनिय क्षेत्र हैं जो लोगों को खूब रिझाते हैं.ऐसा ही एक मनोरम और प्राकृतिक सौंदर्य से संपूर्ण स्थल है चाल्हो वाटर फॉल.

यह जल प्रपात जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर की दूरी पर चाल्हो पहाड़ के ऊपर प्रकृती की गोद में अवस्थित है. प्राकृतिक जल प्रपात और उसके आस पास का प्राकृतिक सौंदर्य देखते बनता है. जहां साल के ४ ५ महीनें चाल्हो पहाड़ की इस ऊँचाई पर शितल जल का यह झरणा अपनी शितलता प्रदान करता है .चाल्हो पहाड़ सात पहाड़ों की एक मिलन श्रृंख्ला है, इसी श्रृंख्ला पर अवस्थित है ये झील, ओर यही झील इस जल प्रपात का श्रोत है. गर्मीयों के मौसम में भी जहां मैदानी जमीन पर कई ऐसे जगह हैं जहां पानी के लिए हाहाकार मच जाता है,वहां ऊपर पहाड़ पर यह झील चाहे जंगली जानवर पशु पच्छी हो या ईंसान सबको अपना शितल और शुद्ध जल बिना किसी भेद भाव के सैंकड़ो वर्षो से उपलब्द करा रहा है.
जिले के मदनपुर प्रखंड क्षेत्र के उत्तर पूर्व भाग में जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर अवस्थित है चाल्हो पहाड़ के ऊपर यह प्राकृतिक वाटरफॉल. यहां का प्राकृतिक सौंदर्य संपूर्ण इलाके में वर्णित है . चाहे त्यौहार हो या और भी कोई अवसर लोग पूरे परिवार को साथ लेकर पिक्निक मनाने बरियावां गांव के पास चाल्हो पाहाड के इस वाटरफॉल पर चले आते हैं . परंतु यह दिगर बात है कि आज तक इस जगह को पर्यटक स्थल बनाने की दिशा में कोई भी कदम नहीं उठाया गया है . इस क्षेत्र को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो यह संभव है कि दूर दराज से पर्यटक यहां की अलौकिक प्राकृतिक संरचना के दीदार को खींचे चले आएंगे .

यह अपनी सुंदरता की छटा ऐसी बिखेरेगा कि लोगों को यह खूब रिझायेगा . इसका कारण यह है कि वाटरफॉल दोनों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है , जिसकी अद्भुत बनावट , अद्वितिय हरियाली और बड़े क्षेत्र में फैला होना इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है . ऐतिहासिक मानव घाट मन्दिर से महज थोड़ी दूर पर स्थित यह वॉटरफाल आसपास छोटे-छोटे चट्टानो और हरे भरे पेड़ों से आच्छादित है . जो की पिक्निक मनाने के लिए बिलकुल उपयुक्त जगह है . वहीं पाहाड़ पर कल कल करती जलधारा और पत्थरों की खूबसूरत बनावट भी लोगों को खूब लुभाती है . इसके अलावा ऊपर बने झील और पहाड़ियां भी लोगों को आकर्षित करती है. जल का प्राकृतिक श्रोत ,समुचित भण्डारण ओर पहाड़ के ऊपर चट्टान निर्मीत गुफाओं के कारण ही यह नेपथ्य में उग्रवादियों के भी पसन्दिदा ठिकानों मे से एक रहा है.
और लाल आतंक के कारण ही आजतक यह इलाका पर्यटन के पैमाने पर फिट नहीं आ सका है


चाल्हो वाटरफॉल के अतिरिक्त मदनपुर प्रखंड क्षेत्र में पर्यटन के लिहाज से ऐसे ही उपेक्षित है उमगा,सिताथापा और हद हदवा वाटरफॉल . ये सभी स्थल भी लोगों को खूब रिझाती है जहां बनि मंदिर, तालाब आदि देखने दूर दराज से लोग आते हैं. अगर इन जगहों पर सरकार की ओर से व्यवस्था मुहैया करा दी जाए तो लोग जुटेंगे और सरकार को भी राजस्व का फायदा होगा.

वर्ष ऊन्निस सौ अस्सी से पहले लोग यहां पिक्निक मनाने आया करते थे.

अस्सी के दशक में चाल्हो को नक्सल के सेफ जोन के रूप में जाना जाता था .कभी यहां नक्सलियों को प्रशिक्षण दिया जाता था .ग्रामीणों ने बताया कि अस्सी के दशक में मोहम्मद अंसार मियां इस इलाके के जमींदार हुआ करते थे और यहां उनका कचहरी हुआ करता था.
लोगो ने बताया कि पाहाड़ पर पानी को एकत्रित करने के लिये पाहाड़ के ऊपर तालाब बनाया गया है जिसका पानी ही वॉटरफाल में आता है .फिर पानी पाहाड़ के नीचे बने आहर में एकत्रित होता है . जिसके पानी से करीब 20 स 30 गांव के लोगो की खेती होती है. इस पानी के लिये नगवां गढ़ और जमींदार अंसार मिया के साथ कई बार लड़ाईयां भी हुई है .लेकिन ऊन्निस सौ अस्सी के बाद इस इलाके में नक्सली धमक सुनाई देने लगा और नक्सली साम्राज्य कायम हो गया .तब से इस इलाके में लोग यहां आने से डरने लगे .अब फिर से इस इलाके में लोग पिक्निक का आनंद ले रहे है. बता दें कि यह वाटर फॉल बरसात माह में शुरू होकर माघ माह तक चलता है

नक्सली साये में होना बताई गई विकसित ना होने की वजह



चाल्हो इलाके को विकसित न होने की वजह अक्सर नक्सल प्रभावित इलाके में होना बताया जाता है . परंतु वास्तविक स्थिति इससे कोसों दूर है .लगातार इन इलाकों में पुलिस मूवमेंट होने की वजह से नक्सली इन क्षेत्रों में आने से डरते हैं. परंतु अभी भी नक्सली को कारण बता कर इसके विकास से पल्ला झाड़ लिया जाता है . अब देखना यह है कि क्या कभी इस क्षेत्र का विकास पर्यटन स्थल के रुप में किया जा सकेगा? या ऐसे ही नक्सल प्रभावित हौने का दर्द झेलता रहेगा यह स्वपनीम स्थल.


स्थानीय निवासीयों ने बताया कि इसके पानी पीने से लोगो की पेट की बीमारी ठीक हो जाती है. राजू यादव, संजय यादव, अनिल मेहता ईत्यादी लोगों ने कहा कि बहुत ही सुंदर जगह है अगर इसका विकास हो तो काकोलत, तुतला धाम,माझर कुंड की तरह यहां भी लोग पहुँचेंगे.
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