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Sunday, September 16, 2018

Aurangabadian

Top tourist places in Aurangabad bihar औरंगाबाद जिले में मुख्य रूप से पर्यटन क्षेत्र

Ramesh chowk aurangabad
Ramesh chowk aurangabad

औरंगाबाद जिला बिहार के 38 जिलों में से एक है। इसका इतिहास भी काफी पुरानी है और इस वजह से पुरानी इतिहास के लिए जाना जाता है। इसी पुरानी  इतिहास के वजह से इसे बिहार का चितोरगढ़ कहा जाता है। यहां आप अधिक औरंगाबाद जिले का इतिहास पढ़ सकते हैं।  औरंगाबाद जिला फसलों और पतझड़ वनों से  काफी हरि भारी होने के अलावा पक्षियों के चहचहाना लोगो को काफी लुभाता है। इस प्रकृतिक पहचान और आकर्षण के अलावा इस जिला में अनेकों ऐसे ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक स्थान है जो काफी दूर दूर के लोगो को अपनी तरफ खिंचता है। लोग सलों साल यहां घूमने को आते रहते है। आमतौर पे यहाँ घूमने का मौसम साल में 12 महीने माकूल नही है पर जो सबसे ज्यादा अनुकूल और सहज मौसम अक्टूबर से लेकर मार्च तक होता है। तो इसी चर्चा में आपको बताने जा रहा हूं औरंगाबाद जिले में प्रमुख घूमने के स्थान के बारे में।





देव सूर्य मंदिर Deo Surya Mandir


 औरंगाबाद जिले में धार्मिक लिहाज से देखा जाए तो पहले स्थान पे देव सूर्य मंदिर ही है। देव सूर्य मंदिर देश और बिहार का धरोहर और अनूठी विरासत है. हर साल छठ पर्व पर यहाँ लाखो स्राधालू छठ करने झारखण्ड , मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से यहाँ आते है.  कहा जाता है की जो पूजा करते है उनकी मनोकामना जरुर पूरी होती है. और अधिक पढ़े यहाँ से--


अमझर शरीफ दरगाह Daragah Amjhar sharif

ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से मशहूर बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला अंतर्गत हसपुरा प्रखंड का अमझर शरीफ खानकाह सरकारी और प्रशानिक भेदभाव का शिकार है। इस स्थल को अगर विकसित किया जाता तो पर्यटन के क्षेत्र में इस जगह का अलग नाम  होता। और अधिक पढ़े यहाँ से--


देवकुण्ड शिव मंदिर Deokund shiv Mandir


देवकुंड औरंगाबाद। deokund Aurangabad, महर्षि च्यवन की तपोभूमि देवकुंड में कुण्ड की अग्नि पांच सौ वषरे से अधिक समय से प्रज्ज्वलित है। अरवल और औरंगाबाद की सीमा पर स्थित देवकुंड वह धरती है जहां भगवान श्री राम गया में अपने पितरों को पिण्डदान करने से पूर्व ही भगवान शिव की स्थापना कर पूजा अर्चना की थी।  और अधिक पढ़े यहाँ से--




उमगा सूर्य मंदिर Umga Surya Mandir

ये प्राचीन सूर्य मंदिर जो उमगा में है औरंगाबाद  जिला मुख्‍यालय से 27 कि0‍मी0 की दूरी पर अवस्थित है और  ग्रैण्‍ड ट्रंक रोड जिसे अधिकतर लोग( जीटी रोड के नाम से भी जानते है) से 1.5 कि0मी0 दक्षिण की ओर एवं देव सूर्य मंदिर से से 12कि0मी0 की दूरी पर स्थित है जो कि औरंगाबाद जिले और  बिहार राज्य की सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरों में से एक है। और अधिक पढ़े यहाँ से--


 दाऊद खान का किला Daud Khan ka Kila

दाउदनगर में स्थित उनका का किला आज भी 17वीं शताब्दी की याद ताजा कराता है जो कि आज कल इस किला की स्थिति सही रख रखाव के अभाव में दयनीय स्थिति में है।
याद रहे पलामू युद्ध में विजयी रहे दाऊद खान तत्तकालीन बादशाह औरंगजेब के करीबी माने जाते थे। काफी लोगों का मानना है कि पलामू फतह के बाद वापस जा रहे दाऊद खान ने मोजुदा दाउदनगर के क्षेत्र में आराम करने के लिए कैंप डाला। उन्हें यह क्षेत्र काफी हद तक  पसंद आया लिहाजा यही एक कारण था जो उन्होंने दाउदनगर की स्थापना की। और अधिक पढ़े यहाँ से--


देव राज किला dev Raj Kila

बताना चाहूंगा कि ये राजपूत परिवार के सिसोदिया वंस से जुड़ी हुई है. ये वर्णन इतिहास में मिलती है कि देव किला का सबसे अंतिम राजा जगनाथ जी थे . जो काफी लंबे समय तक अपने राज्य में शांति और वह प्रजा लोगो के साथ शांति के साथ राज्य का जिम्मा अपने हाथ मे लेकर शासन किया. उनका कोई भी अपना संतान नही था. उनके देहांत के बाद बारी आई कि अब राज्य का जिम्मा कौन संभाले तो ये जिम्मेदारी उनकी बीवी को लेनी थी. उनकी दो पत्नियां थी जेसमे से राज्य का जिम्मा उनकी छोटी पत्नी ने संभाली। और अधिक पढ़े यहाँ से--

पीरू और सिरिस  Piroo and Siris

पीरू औरंगाबाद जिले के हसपुरा प्रखंड से 6 किलोमीटर दक्षिण में स्थित बड़ा सा एक गांव है। हालांकि ये जगह आधिकारिक तौर पे बहुत समय पहले प्रितिकूट नाम से जाना जाता था। पीरू का भारत का इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है।। आप ने भारत के मशहूर और सुप्रसिद्ध कवि बाणभट्ट का नाम जरूर सुना होगा वो सुप्रसिद्ध महाकवि पीरू के ही निवासी थे। हालाँकि पीरू को जो नाम हासिल होना चाहिए था वो अभी तक हासिल नही हो पाया।

सिरिस Siris सिरीस औरंगाबाद पर्यटन क्षेत्र के नक्शे पर एक और महत्वपूर्ण स्थान है। सिरीस शेरशाह और मुगल साम्राज्य के शासन के दौरान एक परगना हुआ करता था। कई सालों तक यह स्थान 1857 के विद्रोह के कुछ गुमनाम शूरवीरों के खेल का मैदान हुआ करता था।  सिरीस में एक मस्जिद भी है, जो औरंगजेब के शासनकाल में बनवायी गई थी। आज भी जो लोग घूमने को लोग यहाँ आते हैं तो इसमें जरूर जा जाते है।




Forts of Pawai  Mali and Chandangarh

पवई, माली और चंदनगढ़ उन लोगों के लिये आनंदित करने वाले स्थल हैं, जो पुरातत्व में रुचि रखते हैं यहां तक अन्य लोगों को भी इस धरोहर को देख प्रसन्नता होगी। यह जगह उन शासकों के पुराने किलों जैसे पुरातात्विक खजाने से भरी है, जो राजस्थान से पलायन करके यहां आये होंगे।

दोस्तो ऊपर दिए गए औरंगाबाद जिले में टूरिस्ट अट्रैक्शन से संबंधित जगह है जो लिस्ट किया गया है अगर इस लिस्ट में अगर आपको लगता है कि कोई स्थान छूट गया है तो आप हमें जरूर suggest करें कमेंट के रूप में। आपकी राय को जरूर लिस्ट किया जाएगा।
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Tuesday, August 21, 2018

Aurangabadian

Sachchidananda Sinha College most prestigious college सिन्हा कॉलेज

Sachchidananda Sinha College
Sachchidananda Sinha College

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,

दोस्तों आज हम आपको एक ऐसे टोपिक पे बात करने जा रहे है है जिसके बारे में आपको बहुत ही कम जानकारी होगी. और ये सभी जानकारी आप सब को जानना बहुत ही जरुरी भाई है क्योकि आप सब औरंगाबाद जिले के निवासी है और इस जिले के जितने भी एतिहासिक स्थान और संसथान है उसका इतिहास भी जानना बहुत जरुरी हो जाता है. आप हम में से सभी लोग अपने स्कूली शिक्षा के दौरान भारत या बिहार या फिर विशव के इतिहास के बारे में तो स्टडी कर लेते है पर अफसोस अपने स्थानीय जगह या शहर में जो प्राचीन एतिहासिक धरोहर है उसकी तनिक भी जानकारी भी नही होती .

दोस्तों हम बात कर रहे है औरंगाबाद में मौजूद एतिहासिक और बहुत ही पुराने ज़माने के विद्यालय जो की हमारे देश की आजादी के पहले से ही यहाँ पे सकुली तालीम हासिल करते आ रहे है. और आप में से बहुत से ऐसे होंगे जो इसी विद्यालय से अपनी पूरी पढ़ायी करी होगी . यहाँ से पढाई ख़तम करने के बाद आप कही उच्च शिक्षा के मकसद से कही दुसरे विद्यालय में नामांकन कराया होगा. इतना ही नही इस विद्यालय से उच्च तालीम हासिल करने के बाद आप कही अच्छी जॉब कर रहे होंगे.
वास्तव में देखा जाये तो विद्यालय हमारे किस्मत खोलने का और हमारे भविष्य सुधरने का एक पाठशाला है. जी बिलकुल हम बात कर रहे है औरंगाबाद में एक तरह से एतिहासिक महाविधालय सिन्हा कॉलेज के बारे में . बस इस कॉलेज का नाम ही काफी के ये जानने के लिए की ये कितना मशुर है लोगो के जबान पे. और ये आज किसी के नाम के मोहताज नही है इसके बारे में लोगो से अवगत कराराने में.

आप में से सभी लोग अपनी स्टूडेंट लाइफ में औरंगाबाद के किसी भी कॉलेज में आपने स्टडी किया होगा लेकिन जब भी आपकी पढाई की सेमेस्टर पूरी होती होगी और एग्जाम के समय आपको हमेशा एक विधालय का आपके दिमाग में ख्याल जरुर आता होगा सिन्हा कॉलेज के बारे में. आप सोचते होंगे की हमारे स्कूल का एग्जाम का सेंटर कही सिन्हा कॉलेज में चला जाये. मै यहाँ बस ये बताना चाहता हूँ की बचपन से लेकर अपने हायर स्चूलिंग तक इस कॉलेज की यादे जरुर ताजा हो जाते होंगे.

आए जानते है इस एतिहासिक महा विधालय के बारे में. इस कॉलेज का पूर्ण नाम है सचिदानंद सिन्हा कॉलेज जो अधिकतर लोगो के द्वारा सिन्हा कॉलेज के नाम से जाना जाता है जो की इसे स्थापित सन 1943 ई. में यहाँ के स्थानीय निवाशी और सामाजिक कार्यकर्त्ता और गरीब लोगो के मसीहा कहे जाने वाले श्री अखौरी कृष्णा प्रकाश सिन्हा अलियास त्रिपुरारी बाबु और उनके जिगरी दोस्त एवं मोरल सहायक दोस्त डॉ सच्चिदानंद सिन्हा तथा उस समय के महान सवतंत्र सेनानी डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा के काफी सार्थक पर्यास बदौलत किया गया था.

बताना चाहूँगा की इस कॉलेज के स्थापित होने के बाद इस यूनिवर्सिटी का नाम पटना यूनिवर्सिटी उस समय के तत्कालीन वाईस चांसलर डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा, जो की उन्होंने ने ही उस समय के एक छोटे से सब डिवीज़न टाउन औरंगाबाद जहा उस वक्त जिले में या आस पास के जिले में भी एक भी कॉलेज नही था एक बहतरीन कॉलेज का पटना यूनिवर्सिटी से इसका मन्योव्ता 1944 में प्राप्त करवाया.

एस सिन्हा कॉलेज औरंगाबाद मैं मार्किट से 3 किलो मिटर दूर पोइवं रोड पे स्थित है जो उस रोड से गुजरने वाले सभी यात्री को इसके कैंपस में मौजूद हरे हरे पढ़ और सुंदर कैंपस से उनके मन को मोह लेता है. इस कॉलेज का कुल 20 एकर जमीन में फैला हुआ है. बताना चाहूँगा की ये मगध यूनिवर्सिटी सबसे पुराना और एतिहासिक कॉलेज में से एक है. यहाँ तिन स्ट्रीम साइंस , कॉमर्स , सोशल साइंस में कुल मिलकर 16 विषयों में स्टूडेंट्स को स्टडी करने का मौका मिलता है.

इतना ही नही यहाँ वोकेशनल डिग्री कोर्सेज भी सन 2000 से सफलतापूर्वक अध्यन किया जाता है. इसके आलावा यु. जी. सी. स्पॉन्सर्ड वोकेशनल कोर्सेज जैसे बचेओर ऑफ़ सेल्स प्रमोशन और सेल्स मैनेजमेंट तथा दूसरा सेल्फ finnced वोकेशनल कोर्सेज बैचलर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन, बैचलर ऑफ़ बिज़नस मेनागेमेंट बैचलर ओ बायोटेक्नोलॉजी 2007-2008 से सुरुवात भी किया गया है.

बात करे इस कॉलेज में स्टूडेंट की कुल संख्या जो पुरे कॉलेज में अध्यन करते है तो उनका कुल संख्या होता है 9000 जो की अपनी स्टडी पूरी कर के प्रदेश और देश में इस कॉलेज का नाम रोशन करते है. इसका एक जीता जगता मिशल है सवार्गीय श्री हरगोविंद सिंह और प्रोफेसर मंगल दुबे जो की मगध यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर इसी महाविधालय से अध्यन कर के बने थे.

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Saturday, January 13, 2018

Umar Umar

Aurangabad sadar hospital aurangabad | औरंगाबाद सदर अस्पताल औरंगाबाद बिहार।

औरंगाबाद सदर अस्पताल
औरंगाबाद सदर अस्पताल
ये फोटो औरंगाबाद सदर अस्पताल (सरकारी अस्पताल) का  है जो सरकार द्वारा संचालित किया जाता है। इसमें मरीज मुप्त में इलाज करवाते है। आप इसे दूर से ही पहचान सकते है क्योंकि भाई जो सरकारी अस्पताल है यहाँ आपको बड़ी बिल्डिंग तो दिख जाएगी हर एक डिपार्टमेंट के लिए एक अलग से रूम दिखेगा। साथ ही आधुनिक इलाज के लिए जो भी उपकरण जरूरत पड़ती है वो सभी अवेलेबल है पर किया जो इलाज आपको प्राइवेट अस्पताल में इलाज मिलती वो किया यहां मिलती है? यहाँ की हालत इतनी खराब है उसका बयान नही किया जा सकता है। आपको तो कहने को तो फ्री में इलाज तो हो जाती है पर दवा किया आपको उसी अस्पताल में मिलती है? भाई सभी जगह भ्रस्टाचार है यहां तक कि अस्पताल में भी जहा किसी की जिंदगी बचाई जाती है।।
सदर अस्पताल का हाल बेहाल है। यहां अस्पताल की व्यवस्था सुधरने के बजाय बिगड़ता जा रहा है। अस्पताल में मरीज प्रतिदिन हंगामा करते हैं। यूं कह लीजिए अस्पताल को आक्सीजन की जरूरत है। अस्पताल को आइएसओ का दर्जा मिला है परंतु यहां सुविधा के नाम कुछ भी उपलब्ध नहीं है। एक्सरे एवं अल्ट्रासाउंड सुविधा महीनों से बंद बड़ा रहता है। मरीज इलाज के लिए अस्पताल में तड़पते रहते हैं परंतु उनका हाल जानने भी कोई कर्मी नहीं पहुंचता है। परिसर में मरीज भटकते रहते हैं। स्थिति यह है कि अस्पताल से आमजन का विश्वास उठ जाता है। सरकार तो बहुत ही पैसे खर्च करती है पर अधिकारी उसे उपर ही गडक जाते है।
32 की जगह छह चिकित्सक : सदर अस्पताल में 32 चिकित्सकों के स्वीकृत पद हैं। चिकित्सकों का अधिकांश पद खाली पड़ा है। चिकित्सकों के न रहने के कारण अस्पताल की व्यवस्था बदतर हो जाती है। यहां कई विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद खाली पड़ा है। अस्पताल में शिशु, सर्जन, मुरक्षक, चर्म रोग, कान, नाक, गला रोग के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है।

112 में मात्र 60 दवा उपलब्ध : सदर अस्पताल में दवा का अभाव हमेशा रहता ही है। दवा पर यहां एक वर्ष में 26 करोड़ रुपये खर्च होता है। अस्पताल में हमेशा दवा का अभाव रहता है। मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। नियमानुसार आउटडोर में 33 दवा होनी चाहिए परंतु यहां मात्र 16 दवा उपलब्ध है। इंडोर में 112 की जगह मात्र 60 दवा उपलब्ध है। दवा नहीं रहने के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दवा के लिए अस्पताल में मरीज तड़पते रहते हैं।


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Sunday, January 7, 2018

Aurangabadian

History of aurangabad district । औरंगाबाद जिले का इतिहास

औरंगाबाद ब्लॉक डिवीजन सूची । List of cd block and sub division of Aurangabad.

वैसे औरंगाबाद जिले का इतिहास बहुत ही पुराना रहा है इसका इतिहास जानने के लिए आपको मगध का इतिहास जानना पड़ेगा। जब इसका विभाजन  नहीं हुँआ था तो ये एक सब डिवीजन हुआ करता था मगध का ।  वैसे ये विभाजन के पहले ये मगध पटना और औरंगाबाद ये सभी मिलकर एक जिला था । काफी  आंदोलन और संघर्ष और लोगों की मेहनत के बाद ये आखिर कार  इसका विभाजन का समय आ गया और इसका विभाजन 26.01.1 9 73 को सरकारी नोटिफिकेशन नंबर 07 / 11-2071-72 दिनांक 1 9 .01.1973 के अनुसार विभाजित किया गया । अब औरंगाबाद एक अलग बिहार का 38 वां जिला गठित हो गया था इसके बाद जिले का प्रथम  श्री कश्य्ब्रमण्यम  जिलाधिकारी थे और श्री सुरजीत कुमार साहा तत्कालीन उप-विभागीय अधिकारी थे। 

1 99 1 तक औरंगाबाद जिले में मात्र एक ही सब डिवीजन था और  वह औरंगाबाद सदर था  कभी बड़े क्षे़त्र  होने के करना योजनाओं को सभी जिले में लागू करने में काफी दीकत होती थी और उस वक्त एक और संघर्ष जारी था दाऊद्नगर को एक अलग जिले बनाने का तो जो की ये संघर्ष अब भी जारी है तो आखिर कार  इसे  सन  03.1 99 1 को, एक अन्य उप-प्रभाग अर्थात दाऊद्नगर को एक सब डिवीजन बनाया गया ।  उस वक़्त श्री मदन मोहन श्रीवास्तव,  पहले उप-विभागीय अधिकारी थे। वर्तमान में बिरेंद्र बहादुर पांडेय औरंगाबाद के जिला मजिस्ट्रेट हैं और सुशील खोपरे पुलिस अधीक्षक हैं। सर्वश्री अनिल कुमार और छत्तीलाल प्रसाद क्रमशः औरंगाबाद और दौडनगर के उप-विभागीय अधिकारी हैं।

अभी वर्तमान में औरंगाबाद में कुल 2 सब डिवीजन है और टोटल 11 ब्लॉक है । 

औरंगाबाद जिले में तालुका / सीडी ब्लॉक की सूची

तहसील / सीडी ब्लॉक नामकुल: ग्रामीण + शहरी जनसंख्या (2001)कुल: ग्रामीण + शहरी जनसंख्या (2011)पिन कोड
औरंगाबाद222,434282,099824,101
वरुण161,515199,870824,112
दौडनगर167,420206,683824,113
देव137,796172,731824,202
गोह185,008233,894824,203
Haspura125,946160,475824,120
कुटुम्ब183,299225,014824,123
मदनपुर166,172196,435824,208
नबीनगर243,779296,554824,301
obra179,179226,501824,124
रफीगंज240,507310,987824,125
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Sunday, October 8, 2017

Umar Umar

Anugraha Narayan Road railway station| AUBR station अनुग्रह नारायण रेल्वे स्टेशन


Anugraha Narayan Road railway station

Anugraha Narayan Road railway station

Anugraha Narayan Road railway station

Anugraha Narayan Road railway station

Anugraha Narayan Road railway station

aurangabad bihar railway station

, Anugraha Narayan Road railway station is a main railway station in Aurangabad districtBihar. Its code is AUBR. It serves Aurangabad town. The station consists of 4 platform.

This is main railway station of Aurangabad District named after eminent nationalist and one of the makers of modern Bihar, Bihar Vibhuti Dr.Anugrah Narayan Sinha.There is need to more stoppage superfast train many people of this region take train from other station which is very expensive to common people.make the A.N ROAD a first class station because this station named great freedom fighter anugrah babu.augrah narayan road station is now A GRADE station. it is just beside of jamhor.
Nearby cities: AurangabadDehri-on-Sone,Sasaram
Coordinates:   24°51'20"N   84°19'46"E
In below table major information about station has been given . Table source wikipedia.
Anugraha Narayan Road railway station
Indian Railway Station
LocationAnugraha Narayan Road, Aurangabad, Bihar, Bihar
India
Elevation104 metres (341 ft)
Owned byIndian Railways
Line(s)Gaya-Mughalsarai section
Platforms4
Tracks6
ConnectionsAuto stand
Construction
Structure typeStandard (on ground station)
ParkingNo
Bicycle facilitiesNo
Disabled accessNo
Other information
StatusDouble Electric-Line
Station codeAUBR
Zone(s)East Central Railway
Division(s)Mughalsarai railway division
ElectrifiedYes

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Sunday, April 16, 2017

Umar Umar

Over Bridge (Bypass) of aurangabad Bihar| औरंगाबाद का ये ओवर ब्रिज

 OverBridge of Aurangabad bypass
औरंगाबाद ओवर ब्रिज।
ये औरंगाबाद का ओवर ब्रिज की तस्वीर है जो एन एच 1 उस से होकर गुजरी है। औरंगाबाद शहर जिले के एक मात्र ओवर ब्रिज है जो पुरानी जी टी रोड से होकर मैन हाइवे जो कि पटना की तरफ जाती के लिए बना है। ये इस खास उद्देश्य के लिए बना है कि पुरानी जी टी रोड से हो कर गाड़िया बिना किसी देर या जाम में फसे आगे निकल सके और उसी रास्ते से जो एन एच 1 जो हाईवे जो गुजरी है उसे कोई दिक्कत न हो ।पर आज कल वो सभी उद्देश्य खत्म हो चुका है और ये ब्रिज अतिक्रमण का शिकार हो गया है।आये दिन हमेशा यहां भयंकर जाम लगती है। ये सब ब्रिज के नीचे जो अतिक्रमण है उसके वजह से जाम लग रही है।
सड़क पर ठेले खोमचे और टिकट बुकिंग काउंटर की बड़ी-बड़ी गुमटियां लगा देने के कारण जाम की समस्या खड़ी होने लगी है. गया जाने वाली रोड में ओवरब्रिज के समीप दर्जनों बस सेवा के लिए गुमटी लगाकर ऑफिस खोल दिया गया है.वहीं बसों की पार्किंग होती है और यात्रियों के कारण सड़क पर ठेले व खोमचे भी सजा करते है.
अतिक्रमण के कारण सड़कें संकीर्ण हो गयी है.सरकारी जमीन पर इस अवैध कब्जे से भारी वाहनों के न मुड़ पाने एवं बसों के खड़े रहने के कारण जाम की स्थिति उत्पन्न हो रहती है.बता दे कि स्थानीय लोगों ने इस अतिक्रमण का कई बार विरोध किया,लेकिन बस संचालक व बसों के एजेंट अतिक्रमण हटाने को तैयार नहीं होतें।. इधर अवैध तरीके से कब्जा करके लगाये गये टिकट बुकिंग के लिए गुमटी का अब कुछ बस संचालक जमकर विरोध कर रहे है.
यहां पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि अगर प्रशासन इस व्यवस्था को सुधारने में आगे नहीं आती है तो कभी भी जनाक्रोश भड़क सकता है .
एक तरफ खड़ी होती हैं, तो दूसरी तरफ है खाई : एक वर्ष पूर्व तक न तो अतिक्रमणकारियों का कब्जा था और नही ही जाम की बड़ी समस्या. लेकिन हाल के दिनों में देखते ही देखते कई नयी गाड़ियों का परिचालन गया रोड से होने लगा और इसके बुकिंग के लिए बकायदा कांउटर लगाकर गुमटिया सज गयी.
लोगों का कहना है कि इन्हीं के कारण ओवरब्रिज पर जाम की समस्या उत्पन्न होती है,जिसमें निजी वाहन तो फंसते ही है,साथ में एम्बुलेंस और स्कूल के बसें भी जाम में फंस कर मरीज व बच्चों को परेशानी में डालते है. गया रोड में जिस जगह पर बड़ी बसों की पार्किंग होती है उसके दूसरी ओर बड़े-बड़े गडढे है. गडढों से बचने के लिए गाड़ियों को दाये-बाये करने के क्रम में भी भीषण जाम लग जाती है.

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Umar Umar

Rabi crops around aurangabad Bihar rabi phasal| औरंगाबाद में रबी फसल

Rabi phasal of aurangabad village
 Rabi phasal of aurangabad village
 Rabi phasal of aurangabad village
औरंगाबाद में फसल
ये तस्वीर औरंगाबाद जिले के किसी गाँव के गेहूं के रबी फसल की तस्वीर है। हरा भरा गाँव की ये  नजारा सिर्फ गाँव में ही दीखता है। जी हां ये तस्वीर तो सिर्फ गांव में ही देखने को मिलती है क्योंकि गांव में ही किसान बस्ते है। जहाँ किसान बास्ते वही इतनी हरियाली भरी खेत देखने को मिलता है। रबी फसल आम तौर पे धान की कटाई के बाद उसे बोया जाता है और लगभग फरवरी मार्च तक आपको पूरे खेत मे हरियाली देखने को मिलेगा। आप खेतो में जाएंगे तो सरसो के खेतों में पीली पीली फूलो को देख कर आपका मन खिल जाएगा ऐसा सिन सिर्फ गांव में ही देखने को मिलती है। गेंहू के खेतों में चारो तरफ आपको हरियाली देखने को मिलेगी । यहाँ पर आपको इच्छा करेगी कि आप वहाँ पे कुछ समय बैठ कर आनंद ले साथ ही शुद्ध हवा और उस वक़्त वसंत ऋतु सर पे रहता भी है। मतलब ये जो रबी फसल का जो सीजन है काफी आंनद लेने का है। किसान अपना फसल तो बहुत ही मेहनत से बोता है पर उसका मेहनत का फल जो मिलना चाहिए वो नही मिल पा रहा है। कभी सरकार के न्यूनतम मूल्य से कभी प्रकृति नुकसान से । और ये सब का मार सिर्फ किसान ही झेलता है। वैसे औरंगाबाद के किसान काफी मेहनती है किसी भी तरह का  हालात हो पर वो अपना पेशा और अपनी जिमेदारी नही छोड़ते। ऐसे में सरकार को चाहिए की सरकार को डीजल और सोलर पर भरपूर सब्सिडि देनी चाहिए ताकि बारिश के न होने पर ऊर्जा के इन वैकल्पिक स्रोतों से किसान अपनी फसल बचाने में कामयाब हो सके।




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Sunday, February 19, 2017

Umar Umar

Maharana Pratap Singh Chowk in aurangabad bihar| महाराणा प्रताप चौक औरंगाबाद बिहार।

Maharana Pratap Singh Chowk in aurangabad bihar. (Jasonya mod aurangabad bihar जसोइंया मोड़ औरंगाबाद बिहार)
महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया, महाराणा प्रताप चौक औरंगाबाद बिहार। Maharana Pratap Singh Chowk in aurangabad bihar. (Jasonya mod aurangabad bihar जसोइंया मोड़ औरंगाबाद बिहार)
Maharana Pratap Singh Sisodiya-the great Rajput king
Pratap Singh  popularly known by people as Maharana Pratap, was a great ruler of Mewar , a region in north-western India in the present day state of Rajasthan . Maharana Pratap was the son of Udai Singh II (King of Mewar) and his mother Maharani Jaiwanta Bai . Maharana Pratap's birth anniversary, known as Maharana Pratap Jayanti, is celebrated annually on the third day of the
Jyestha Shukla phase. He was the eldest son of Maharani Jaiwanta Bai and Udai Singh II .
He belonged to the Sisodia clan of
Rajputs. He was succeeded by his eldest son, Amar Singh I. Maharana Pratap's biggest enemy was Akbar (Abu'l-Fath Jalal ud-din Muhammad Akbar, popularly known as Akbar I and later Akbar the Great).
Because of his greatness a very beautiful statue has been made in aurangabad dist. The statue has been made on NH2. 
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Saturday, February 18, 2017

Umar Umar

Old bridge road of aurangabad obra road.

aurangabad obra bridge
ओबरा औरंगाबाद पथ पे पुरानी ब्रिज।
ये आप तस्वीर जो देख रहे हैं वो ओबरा से औरंगाबाद जाने वाली हाईवे पे की है जो की बहुत ही पहले इसे निर्माण कराया गया था। इसे काफी लंबे समय से  यूज़ किया गया। पहले बस या ट्रक का आवागमन इसी ब्रिज से होती थी। इससे काफी समय की बचत भी होता था । पर इसपर काफी वाहन चलने से इसकी हालत काफी खराब हो गई। अब इस पर भारी वजन के वाहन पार नही किया जा सकता इससे इसके वजूद का खतरा हो जाएगा। पर अभी भी इसपे कम वजन जैसे दो पहिया वाहन या एक पहिया वाहन सायकल या बाइक को पार किया जा सकता है। ये ब्रिज भले ही जर्जर हालत में हो लेकिन इसने हमलोगों को बहुत ही कम समय मे औरंगाबाद में जाने का रास्ता कभी पहले दिया है। इसके जर्जर हालत में आने के बाद अब समस्या आयी के अब वाहन को कैसे ओबरा रोड से औरंगाबाद ले जाया जाए? तो सरकार की पहल से एक आधुनिक ब्रिज बनाई गई इस रूट पे। जिससे अब यातायात में कोई परेशानी नही आती है। ये जो ब्रिज बनी है बिहार के चर्चित नदी पुन पुन नदी पे बनी है जो बरसात में तो ये उफान पे तो रहती ही गर्मियों में भी पानी हमेशा फॉलो करती है। इससे यहाँ के नजदीकी गांवो को भी कभी लाभ है । नजदीकी गांव के लोग इसी से मार्केट या आते जाते है।।।
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