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Sunday, November 11, 2018

Aurangabadian

छठ पर्व की सुरुआत सर्वप्रथम देवकुण्ड में सुकन्या ने सूर्य उपासना के साथ सुरुवात की थी


देवकुण्ड हसपुरा लोक आस्था का महापर्व छठ व देवकुंड धाम का बहुत पुराना नाता । पुरानी मान्यता के देवकुंड धाम को छठ पर्व का उदगम स्थल माना जाता है । यहां स्थित सहस्रधारा तालाब में लाखों छठव्रती भगवान भास्कर को अर्घ देते है ।


प्रशासनिक उपेक्षा के बावजूद यहां लोगों में उत्साह की कोई कमी नहीं है । इस बार भी देवकुंड मठ व स्थानीय लोग युद्धस्तर पर तैयारी में जुट गए हैं । तालाब की साफ सफाई के साथ अन्य व्यवस्थाओं में लोग लगे हुए हैं । पूरे देवकुंड में रोशनी की फ्याप्त व्यवस्था की जा रही है । वहीं तालाब के पूरब साइड 

बेरिकेडिंग किया जा रह है । अर्थो के समय पांच स्थानीय गोताखोर व 
तालाब में हवा भरे पांच रबर ट्यूब तैनात रहेंगे । 

सीसीटीवी कैमरे से रखी जाएगी कड़ी नजर
 देवकुंड थानाप्रभारी पवन कुमार ने बताया कि पूरे मेला परिसर में आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है । यहां लगभग डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है । इसके लिए जिला से 10 महिला व 15 पुलिस जवान की मांग की गई


सादे लिबास में भी पुलिस के जवान तैनात रहेंगे । स्थानीय स्तर के 50 वॉलेंटियर को भी सुरक्षा में लगाया जाएगा । शनिवार को एसपी डॉ . सत्यप्रकाश भी मंदिर पहुंचे व तैयारियों का जायजा लिया । उन्होंने थानाध्यक्ष को कई आवश्यक निर्देश भी दिए


। 


सुकन्या ने सहस्रधारा कुंड में सर्वप्रथम अर्घ दिया

 देवकुंड मठाधीश कन्हैयानंद पुरी ने कहा कि पुराणों व आंद रामायण छठ पर्व के प्रचलित कथाओं में व महर्ष च्यवन की पत्नी सुकेंन्या नागकन्याओं से सूर्य उपासना की विधि सीखकर देवकुंड में उपासना की थी । सुकन्या ने  सहस्रधारा कुंड में अर्ज दिया था । महर्षि च्यवन का आश्रम देवकुंड में आज भी अवस्थित है । जिसके बाद से ही यहां छठ पूजा मनाया जा रहा है । उन्होंने बताया कि इस बार छठ पूजा पर विशेष संयोग बन रहा है । 
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Thursday, August 2, 2018

Umar Umar

देवकुंड में बनेगा औरंगाबाद जिले का तीसरा केंद्रीय विद्यालय।

Kendriya vidhyalaya Deokund Aurangabad
Kendriya vidhyalaya Deokund Aurangabad
केंद्रीय विद्यालय देवकुंड अब ये नाम सुनने वाले हैं क्योंकि देवकुंड में केंद्रीय विद्यालय के निर्माण की स्वीकृति मिल गई है। इससे न केवल देवकुंड वासियो को लाभ होगा बल्कि आसपास के गांव को भी फायदा होगा। इसके अलावा देवकुंड में अरवल जिले जहानाबाद जिले से भी कई स्टूडेंट्स पढ़ने को आते है उनको भी काफी इससे अच्छी शिक्षा के लिए सहूलियत होगी। 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विद्यालय के भवन निर्माण की राशि के साथ विद्यालय निर्माण की स्वीकृति दी है। विद्यालय निर्माण के लिए देवकुंड मठ के द्वारा जमीन निबंधन किया गया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के क्षेत्र में यह दूसरा केंद्रीय विद्यालय है। गोह विधायक सह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मनोज शर्मा ने बताया कि इसी माह विद्यालय का उद्धाटन किया जाएगा। विद्यालय की स्वीकृति दिलाने के लिए केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के साथ केंद्र सरकार को बधाई। कहा कि सरकार गांवों में शिक्षा का विकास चाहती है। शिक्षा के क्षेत्र में विकास हो रहा है। 

जमीन उपलब्ध कराने के लिए देवकुंड के महंत कैनहैयानंदपूरी को बधाई दिया। कहा कि जबसे मैं विधायक बना केंद्रीय विद्यालय के प्रयास करता रहा। जब तक भवन नहीं बन जाता विद्यालय का संचालन हसपुरा प्रखंड के पथरौल उच्च विद्यालय परिसर में किया जाएगा। बता दें कि पिछले माह मंत्री के द्वारा नवीनगर में बन रहे एनपीजीसी बिजली परियोजना परिसर में केंद्रीय विद्यालय का उद्घाटन किया गया था। मंत्री के प्रतिनिधि पंकज कुमार एवं रालोसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक मेहता ने बताया कि देश के अन्य राज्यों में भी केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति दी गई है। राज्य में देवकुंड के अलावा नवादा में विद्यालय खोलने की स्वीकृति कैबिनेट से मिली है। भवन का निर्माण शीघ्र कराया जाएगा। बता दें कि जिले का यह तीसरा केंद्रीय विद्यालय होगा। सदर प्रखंड के बभंडी में केंद्रीय विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। हालांकि इस विद्यालय को राज्य सरकार से जमीन नहीं मिलने के कारण अबतक भवन का निर्माण नहीं हो सका है।
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Tuesday, July 24, 2018

Umar Umar

देवकुंड अमझर शरीफ़ और सिहुली दरगाह को पुरातत्व विभाग से तीर्थ स्थल घोसित करने की मांग

Deokund Aurangabad
Deokund Aurangabad
Deokund Aurangabad. दोस्तो हमारे औरंगाबाद जिले में ऐसे कितने ऐतिहासिक और पौराणिक जगह है जिसे आज बिहार की किसी भी सरकार ने ये प्रयास नही की उसे लोगो तक उजागर किया जाए लेकिन जनाधिकार पार्टी की प्रयास से अब तो कुछ होने जा रहा ।
देवकुण्ड की ऐतिहासिकता और पौराणिकता जानने बिहार सरकार के पुरातन विभाग की टीम 26 जुलाई के बाद देवकुंड का दौरा करेगी। यह जानकारी जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के प्रदेश प्रवक्ता श्याम सुंदर ने सोमवार को दी।देवकुंड को शिव सर्किट से जोड़ने के बाबत पार्टी प्रवक्ता श्याम सुंदर और प्रदेश सचिव संदीप सिंह समदर्शी निदेशक से मिले।
निदेशक ने भरोसा दिलाया कि पुरातत्व विभाग की टीम देवकुंड, भृगुरारी, मरहीधाम, अमझरशरीफ व सिहुली, रफीगंज के पचार पहाड़ का दौरा करेगी।नेताओं ने कहा कि देवकुंड हिंदू आस्था का बड़ा केंद्र है तो बगल में हसपुरा प्रखंड के अमझरशीर व पीरू सूफी संतों की नगरी है, लेकिन अफसोस कि दोनों ऐतिहासिक धार्मिक स्थल घोर उपेक्षा का शिकार है। आखिर यह मंदिर कब बना और किसने बनाया? देवकुंड मठ का इतिहास क्या है? क्या सचमुच च्यवन ऋषि की यह धरती तपोभूमि रही है? हजारों वर्षों से प्रज्जवलित हो रहे अग्निकुंड की सच्चाई क्या है?
इलाके को विकसित करने के ख्याल से स्वदेशी की राग अलापने वाली सरकार के रहते क्यों नहीं अबतक आयुर्वेदिक शोध संस्थान स्थापित हुए? जबकि देवकुंड का इलाका जड़ी-बुटियों से भरा पड़ा है। इलाके में रोजगार के ख्याल से मॉडल डेयरी व हर्बल खेती को विकसित किया जा सकता है। विद्वान वाणभर्ट और गणितज्ञ आर्यभट्ट की धरती हसपुरा की प्रमाणिक ऐतिहासिकता क्या है?
ऐसे ही कोतूहलपूर्ण रोमांचकारी सवालों के जवाब के लिये जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) हिंदू-मुस्लिम एकता के ऐतिहासिक धरोहरों की प्रमाणिक जांच कराने व विकसित करने तथा देवकुंड को शिव सर्किट सर्किल और सूफी संतों की नगरी अमझरशरीफ और सिहुली समेत अन्य स्थलों को सूफी सर्किट से जोड़ने की मांग राज्य सरकार से की ।
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Wednesday, December 6, 2017

Aurangabadian

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Deokund aurangabad
Deokund aurangabad

Deokund aurangabad
Deokund Haspura Road 
देवकुंड औरंगाबाद। deokund Aurangabad, महर्षि च्यवन की तपोभूमि देवकुंड में कुण्ड की अग्नि पांच सौ वषरे से अधिक समय से प्रज्ज्वलित है। अरवल और औरंगाबाद की सीमा पर स्थित देवकुंड वह धरती है जहां भगवान श्री राम गया में अपने पितरों को पिण्डदान करने से पूर्व ही भगवान शिव की स्थापना कर पूजा अर्चना की थी। बाद में महर्षि च्यवन ने उसी स्थल को अपनी तपोभूमि बनाया और वषरे तपस्या की। पांच सौ वषरे पूर्व बाबा बालपुरी ने च्यवन ऋषि के उसी आश्रम में साधना की और हवन करने के बाद जिन्दा समाधी ले ली। तब से उस कुण्ड की अग्नि आज तक प्रज्ज्वलित है। ऐसा भी नहीं कि उस कुण्ड में प्रतिदिन हवन होता है।ड्ढr ड्ढr इक्के-दुक्के आने-जाने वाले लोग ही उस कुण्ड में धूप डालते हैं या फिर किसी विशेष अवसर पर वहां हवन आयोजित होता है किन्तु कुण्ड की अग्नि पांच सौ वषरे से कभी नहीं बुझी। ऊपर से देखने पर कुण्ड राख का ढेर लगता हैं किन्तु राख में थोड़ा सा भी हाथ डालने पर उसके नीचे अग्नि का एहसास होता है। कुण्ड में धूप डाल कर पास रखे छड़ से जैसे ही राख को उड़ेला जाता है उसकी अग्नि धूप को पकड़ लेती है और कुण्ड से धूंआ निकलना शुरू हो जाता है। कुण्ड के बगल में ही महर्षि च्यवन की प्रतिमा स्थापित है और बगल में बाबा बालदेव का वह आसन रखा है जिस पर बैठकर उन्होंने साधना की थी। कुण्ड के सामने बाबा बालपुरी की समधी स्थल पर छोटे-छोटे दस शिवलिंग स्थापित हैं। बाबा दुधेश्वरनाथ के नाम से प्रसि भगवान शिव का मंदिर कुण्ड से कुछ दूरी पर सहस्त्रधारी (तालाब) के किनारे हैं जहां पहले भगवान श्री राम और बाद में च्यवन ऋषि ने पूजा अर्चना की थी। मंदिर के पुजारी अखिलेश्वरानंद पुरी एवं देवकुण्ड स्थित रामध्यान दास महाविद्यालय के प्राचार्य योगेन्द्र उपाध्याय बताते हैं कि महर्षि चवन जब यहां तपस्या में लीन थे तो उस समय वहां के राजा शरमाती और उनकी पुत्री सुकन्या जंगल में भ्रमण के लिए आए थे। सुकन्या एक टीले के बीच चमकती रोशनी देखकर उसमें कुश डाल दी।ड्ढr ड्ढr दरअसल वह तपस्या में लीन महर्षि च्यवन थे जिनकी आंखे सुकन्या के कुश डाले जाने के कारण फूट गई। महर्षि के श्राप से बचने के लिए राजा ने सुकन्या से महर्षि चवन की शादी कर दी। वृ महर्षि च्यवन से नवयौवन सुकन्या की विवाह के बाद अश्विनी कुमारों ने यज्ञ कर महर्षि च्यवन को उसी सहस्त्रधारा में स्नान कराया और विशेष रसायन तथा सोमरस का पान कराया जिसके बाद महर्षि च्यवन को यौवन प्राप्त हुआ वही रसायन बाद में च्यवनप्राश के नाम से प्रसि हुआ। आज भी सावन के महीने में लोग दूर -दूर से भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं और हवन कुण्ड में धूप अर्पित करते हैं। सहस्त्रधारा में बड़े पैमाने पर छठ पर्व आयोजित किया जाता है।
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